भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य दिवस से सम्बंधित जानकारी देने के लिये जन-सामान्य से आह्वान

भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के प्राकट्य दिवस अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ का समाज के लिए संदेश भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के प्राकट्य दिवस या कुछ लोग उसे जयंती के रूप में विभिन्न तिथियों/दिन व समय पर मनाते चले आरहे हैं, वैसे तो धर्म व आस्था सबका अपना निजी विषय है, ईश्वर का नाम कभी भी, कहीं, कोई भी अपनी तरह से ले सकता है और उनका उत्सव जब चाहे मना सकता है क्योंकि की वह परमात्मा तो वास्तव में अजन्मा है, जिसका न कोई आदि है ना अंत है वह तो अनादि और अनंत है। फिर भी लोकाचार और मानवीय मान्यताएं व परंपराएं जो वास्तव में एक दूसरे को जोड़ने का कार्य करती हैं उनका भी अपना महत्वपूर्ण स्थान है और सामाजिक प्राणी होने के नाते हमसब उन्हें स्वीकारते व मान्यता प्रदान करते हैं। उसी लोकाचार व सामाजिक परंपराओं को दृष्टिगत यदि मान्यताओं में एकरूपता हो तो हमारी परंपरा तो सुद्रढ़ बनती ही है उसको मानने वाला समाज भी एकजुट और सशक्त होता है, इसी भाव को मद्देनजर रखते हुए यह आवश्यक है कि हमारे आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य दिवस/जयंती का भी एक निश्चित दिन/तिथि निश्चित होनी चाहिए ताकि देश व दुनिया में एक-साथ एक दिन ही उक्त उत्सव पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाय, जिससे सम्पूर्ण जन समुदाय हमारी आवाज़ और भगवान श्री चित्रगुप्त जी के बारे में जागरूक हो सके। इसी पवित्र उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी से निवेदन है कि जिनके पास भी अपने कथन (कि भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्राकट्य दिवस/जयंती फलां दिन है, और फलां दिन मननी चाहिए) के पक्ष में जो भी प्रामाणिक तथ्य, साक्ष्य, प्रामाणिक ग्रंथों के उद्धरण (वेद,पुराण,उपनिषद आदि) जिनके आधार पर वह अपने मत के समर्थन को स्थिर व पुष्ट करते हों की दो-दो प्रतियां यदि राष्ट्रीय कार्यालय (1/658/5, सुहागनगर, फिरोजाबाद पिन-283203) को 25 मार्च, 2023 तक उपलब्ध करा दी जांय तो उनसब के एकत्रित होजाने के उपरांत सभी प्रस्तुत तथ्यों, साक्ष्यों, उद्धरणों पर सम्यक पूर्वक विचार करने केलिए एक दो-दिवसीय विमर्श केलिए तिथि व स्थान का निर्धारण किया जाय। जहां सभी पक्ष एकत्र होकर अपने-अपने विचार साझा कर सकेंगे औऱ एक सर्वसहमत निश्चित अभिमत स्थापित हो सकता है, तदनुसार ही सम्पूर्ण देश-दुनिया में हम उक्त तथ्य का प्रचार प्रसार कर लोगों को एक विश्वास के साथ जोड़ने केलिए प्रभावी पहल कर सकते हैं। कायस्थ समाज का सबसे पुराना व जिम्मेदार संगठन होने के नाते यह हमारी संगठनात्मक जिम्मेदारी भी है कि हम अपने समाज के रीति-रिवाज, परंपरा, मान्यता और विश्वासों को जनभागीदारी के साथ जनहित में परिष्कृत,परिमार्जित,सर्वमान्य व सर्वव्यापी बनाने केलिये प्रभावी प्रयास करें। उक्त विषय पर समाज के सभी महिला,पुरूष,युवक,युवतियों से विचार,तथ्य,जानकारियां सादर आमंत्रित हैं।

भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य दिवस से सम्बंधित जानकारी देने के लिये जन-सामान्य से आह्वान